Car Exports Surge 20% in H1 FY26: वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में भारत के यात्री वाहन (PV) निर्यात ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। देश से होने वाली यात्री वाहनों की शिपमेंट में लगभग 20 प्रतिशत की ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जो 4.5 लाख यूनिट के आंकड़े के करीब पहुंच गई है। यह शानदार प्रदर्शन वैश्विक बाज़ारों में कॉम्पैक्ट और मिडसाइज़ भारतीय वाहनों की बढ़ती मांग और भारत के एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में उभरने का स्पष्ट प्रमाण है।
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Maruti Suzuki ने किया निर्यात का नेतृत्व
इस उछाल में सबसे आगे देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) रही है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 2 लाख से अधिक यूनिट्स का निर्यात किया है। इस रफ़्तार को देखते हुए, मारुति सुजुकी पूरे वित्त वर्ष के अंत तक 4 लाख यूनिट्स का निर्यात लक्ष्य आसानी से पार करने की राह पर है।
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निर्यात के मामले में कंपनी के लोकप्रिय मॉडल:
- Maruti Fronx
- Swift
- Baleno
- Dzire
- बहुचर्चित Jimny 5-door (जो अब जापान सहित कई देशों में ग्राहकों तक पहुंच रही है)।
मारुति सुजुकी ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की ओवरसीज़ शिपमेंट भी शुरू कर दी है। e Vitara को मिली शुरुआती जबरदस्त प्रतिक्रिया के चलते अगस्त और सितंबर में ही 6,000 से अधिक इलेक्ट्रिक यूनिट्स का निर्यात किया गया है।
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Hyundai और Nissan का भी शानदार योगदान
देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्यातक हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) ने भी H1 FY26 में ठोस वृद्धि दर्ज की है। कोरियाई निर्माता के निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि के 84,900 यूनिट्स की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो लगभग एक लाख यूनिट्स के करीब पहुंच गया है। हुंडई ने भारत को ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के मॉडलों के लिए एक वैश्विक निर्यात केंद्र बनाने की योजना पहले ही तैयार कर ली है।
जापानी ब्रांड निसान (Nissan) भी चेन्नई स्थित अपनी विनिर्माण सुविधा का उपयोग एक प्रमुख वैश्विक निर्यात बेस के रूप में करना जारी रखे हुए है। निसान भारत से अपनी कॉम्पैक्ट SUV Magnite को 65 से अधिक देशों में और Sunny सेडान को कई मध्य पूर्वी बाजारों में भेजता है। वर्तमान में, भारत निसान के AMIEO (अफ्रीका, मध्य पूर्व, भारत, यूरोप और ओशिनिया) व्यापार क्षेत्र में उसका दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
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निर्यात वृद्धि के मुख्य कारक
इस वित्तीय वर्ष में निर्यात में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण शिप किए जा रहे वाहनों की विविधता है। अब भारत से सिर्फ़ हैचबैक ही नहीं, बल्कि सस्ती हैचबैक, कॉम्पैक्ट सेडान, प्रीमियम एसयूवी, ऑफ-रोड एसयूवी के साथ-साथ इलेक्ट्रिफाइड मॉडल भी विदेशों में भेजे जा रहे हैं।

VolksWagen और अन्य स्थापित OEM (मूल उपकरण निर्माता) ने भी इस निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कम इनपुट सोर्सिंग लागत, कुशल श्रम शक्ति और मज़बूत विनिर्माण गुणवत्ता भारतीय ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ा फायदा साबित हो रही है।
निष्कर्ष:
Car Exports Surge 20% in H1 FY26 ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय ऑटो उद्योग अपनी वैश्विक पहचान को मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। निर्यात वृद्धि का शुरुआती अनुमानों से आगे निकलना यह दर्शाता है कि दुनिया भर के बाज़ारों में ‘मेड इन इंडिया’ वाहनों पर भरोसा बढ़ रहा है। भारत का ऑटो उद्योग वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
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